भारत देश की यह कैसीआजादी कि हम राष्ट्रीय चरित्रों महानायकों को दलबन्दी कहिसाब से मान -सम्मान देते हैं | कल महाराष्ट्र ,विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के विधायक 'मैं सावरकर 'लिखी टोपी पहनकर आये | कारण था राहुल गांधी का यह कहना कि मैं राहुल' सावरकर 'नहीं ,राहुल गांधी हूँ | यहां प्रश्न उठता है जिन वीर विनायक सावरकर ने अंग्रेजों के विरुद्ध लोहा लिया ,सबसे पहले विदेशी वस्त्रों की होली जलाई ,जिनका चित्र संसद भवन में लगाया गया ;उनका विरोध क्यों करना चाहिये ?
पक्ष-विपक्ष अपनी -अपनी राजनीति करें किन्तु राष्ट्रीय चरित्रों को सम्मान भी दें| उनकी अवमानना उचित नहीं है |
चंद पंक्तियों के समाचार -
- मध्यप्रदेश में समय पर नहीं होंगे नगरीय चुनाव |
- कमलनाथ सरकार ने पूरा किया एक वर्ष
- पूछ रहा है देश ,कौन भड़का रहा है छात्रों को नागरिकता संसोधन कानून के खिलाफ
- आधे राज्यों में नहीं है विरोध
- मत ठुकराओ ,गले लगाओ ;यही है भारत ,भारतीय की मांग