राष्ट्रीय चरित्रों की अवमानना क्यों?

     भारत देश की यह कैसीआजादी कि हम राष्ट्रीय चरित्रों महानायकों को दलबन्दी कहिसाब से मान -सम्मान देते हैं | कल महाराष्ट्र ,विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के विधायक 'मैं सावरकर 'लिखी टोपी पहनकर आये | कारण था राहुल गांधी का यह कहना कि मैं राहुल' सावरकर 'नहीं ,राहुल गांधी हूँ | यहां प्रश्न उठता है जिन वीर विनायक सावरकर ने अंग्रेजों के विरुद्ध लोहा लिया ,सबसे पहले विदेशी वस्त्रों की होली जलाई  ,जिनका चित्र संसद   भवन में लगाया गया ;उनका विरोध क्यों करना चाहिये ? 


           पक्ष-विपक्ष  अपनी -अपनी राजनीति करें  किन्तु राष्ट्रीय चरित्रों को सम्मान भी दें| उनकी अवमानना उचित नहीं है |


चंद पंक्तियों के समाचार -



  1. मध्यप्रदेश  में समय पर नहीं होंगे नगरीय चुनाव |

  2. कमलनाथ सरकार ने पूरा किया एक वर्ष

  3. पूछ रहा है देश ,कौन भड़का रहा है छात्रों को नागरिकता संसोधन कानून के खिलाफ 

  4. आधे राज्यों में नहीं है विरोध

  5. मत ठुकराओ ,गले लगाओ ;यही है भारत ,भारतीय की मांग